कर्ण खण्डकाव्य की कथावस्तु/कथानक – Karn Khandkavya Class 10

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now
  1. सामाजिक बन्धनों में बँधी नारी कुन्ती ने विवाह से पूर्व ही कर्ण को जन्म दिया था, परन्तु वह लोक-लाज, कुल-मयांदा आदि सामाजिक बन्धनों के भय से उसका त्याग कर देती है। “किन्तु लाज कुल की हिंसा-सी जाग उठी तत्काल भय समाज का गरज उठा कैसा था स्वर विकराल अविरल आँसू की बूँदों से कर अन्तिम अभिषेक माता ने अपने ही हाथों दिया लाल वह फेंक।”
  2. अपनी सन्तान के प्रति चिन्तित माता कुन्ती कर्ण, अर्जुन, भीम आदि वीर पुत्रों की माना होते हुए भी नारी सुलभ गुण, ममता से युक्त है। इसलिए युद्ध से पूर्व ही वह अपने पुत्रों को लेकर चिन्तित हो उठती है। कुन्ती की सबसे बड़ी चिन्ता यह है कि युद्ध में दोनों ही ओर से उसके पुत्र एक-दूसरे के विरुद्ध अस्त्र-शस्त्र उठाकर खड़े होगे। एक ओर युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल एवं सहदेव होगे तो दूसरी ओर उसी का परमवीर पुत्र कर्ण होगा।
  3. कर्ण जैसे पुत्र-रत्न को पुनः न पा सकने वाली अभिशप्त माता कुन्ती ने कर्ण के जन्म लेते ही उसका परित्याग कर दिया था। युद्ध से पूर्व वह किसी प्रकार साहस बटोरकर कर्ण के पास यह सत्य उद्घाटित करने जाती है कि वह उसी का पुत्र है। उसे आशा थी कि वह उसके पास लौट आएगा, परन्तु ऐसा नहीं हुआ, क्योंकि कर्ण ने दुयोंधन का साथ छोड़ना स्वीकार नहीं किया।
Scroll to Top