पर्यायवाची शब्द की परिभाषा एवं अर्थ –
अर्थ की दृष्टि से समानता रखने वाले शब्द ‘पर्यायवाची शब्द’ कहलाते हैं, इन्हें समानार्थी शब्द भी कहा जाता है।
जैसे-‘आँख’ के पर्यायवाची शब्द नेत्र, नयन, लोचन, चक्षु, विलोचन, दृग, अक्षि आदि हैं।
यह तथ्य ध्यान रखने योग्य है कि किसी भी भाषा में कोई भी दो शब्द पूर्ण रूप से समान नहीं होते हैं। यही कारण है कि पर्यायवाची शब्दों में समानता होने के बावजूद थोड़ी-बहुत भिन्नता अवश्य होती है। इसीलिए प्रसंग एवं सन्दर्भ के अनुकूल पर्यायवाची शब्दों का प्रयोग करना चाहिए। अर्थ की अत्यधिक समानता होने पर भी पर्यायवाची शब्दों का प्रयोग एक-दूसरे के स्थान पर नहीं हो सकता।

- अचल – गिर, शैल, नग, महिधर,
- अंक – चिन्ह, निशान, प्रतीक, पहचान
- अंश – भाग, हिस्सा, भंग, अवयव, खण्ड, सोपान
- अंग – काया, शरीर, गात, बदन तन, वपु, देह
- अग्नि – धनञजय, जातवेद, हुताशन, कृषानु, रोहिताश्व, आग, अनल, पावक,
- आँगन – अँगना, अजिर, प्रांगण, अँगनाई
- आँख – लोचन, नयन, नेत्र, दृग्, आक्ष, चक्षु, दीदा, विलोचन
- आँचल – पल्ला, छोर, दामर, कोना, कोर
- आँसू – अश्रु, नेत्रनीर, नयनजल, नेत्रवारि, नयन-नीर
- आकर्षण – दिलकशी, खिंचाव, विमोहन, सम्मोहन, प्रभावकारी
- इच्छा – अभिलाषा, आकांक्षा, कामना, लालसा, उत्कण्ठा, रूचि, ईप्सा, अभीप्सा, चाहत, मनोरथ
- इच्छुक – अभिलाषी, लालायित, आतुर, उत्सुक, उत्कण्ठित
- इठलाना – शेखी मारना, ऐंठना, इतराना, शान दिखाना
- इनकार – प्रत्याख्यान, अनगीकार, निषेध, अस्वीकृति
- इनाम – उपहार, पुरस्कार पारितोषिक
- ईख – गन्ना, ऊख, रसडण्ड, रसाल, पैंडी, रसद
- ईधन – जलावन, जलाने की लकड़ी, कण्डा, जरनी
- ईदृश – इस प्रकार, इस तरह, ऐसे, इस रीति से
- ईप्सा – चाह, अभिलाषा, इच्छा, अभीप्सा
- ईमानदारी – निष्कपटता, निश्छलता, सदाशयता
- उकसाना – उभारना, उत्तेजित करना, उद्बाधित करना
- उग्र – प्रबल, तेज, प्रचण्ड
- उचित – ठीक, सीचीन, मुनासिब, संगत, वाजिब, उपयुक्त
- उजाड़ – निर्जन, वीरान, बियाबान, सुनसान, बरबाद, खण्डहर
- उजड़ – अभद्र, धृष्ट, लण्ड, गंवार, अक्खड़, उद्धत, लम्पट
- ऊर्जा – शक्ति, ओज, स्फूर्ति
- ऊँचा – उच्च, उत्तुंग, बुलन्द, ऊर्ध्व, ऊपर, तुंग, उन्नत, गगनचुम्बी
- ऊँट – लम्बोष्ठ, महाग्रीव, उष्ट्र
- ऊँघ – तन्द्रा, ऊँचाई, झपकी, अर्द्धनिद्रा, अलसाई
- ऊधम – उपद्रव, उत्पाद
- ऋक्ष – रीक्ष/ऋछ, भालू
- ऋचा – स्तोत्र, वेदमन्त्र
- ऋच्छरा – गणिका, वेश्या, रण्डी, तवायफ़, तमाशबीन
- ऋजु – सीधा, सुगम, सरल, सहज
- ऋद्ध – अनोखा, समृद्ध, सम्पन्न, भरा हुआ
- एक – अनोखा, अद्वितीय अनुपम, प्रथम
- एकता – समान, एकजैसा, एकरूप, समरूप, अभित्र, मेल
- एकसान – स्थिर अनुग्रह, कृतज्ञता, आभार
- एकाग्र – एकमना, मनोयोगी, एक चित्त,
- एषणा – ‘इच्छा’
- ऐंठ – अकड़, ठसक, घमण्ड, गर्व
- ऐंठन – मरोड़, बल, तनाव, अकड़न, उमेठन, घुमाव
- ऐक्य – एकत्व, मेल, एका, एकता
- ऐबी – दुष्कर्मी, बुरा, खोटा, दुष्ट, शैतान
- ऐश्वर्य – वैभव, सम्पदा, सम्पन्नता, समृद्धि, श्री, सम्पत्ति
- ओठ – होंठ, अधर, ओष्ठ, दन्तच्छद, रदच्छद
- ओछा – कमीना, छिछोर, टुच्चा, क्षुद्र, हलका
- ओज – बल, ताक़त, जोर, दम, पराक्रम, वीर्य, शक्ति
- ओझल – अन्तर्धान, अदृश्य, लुप्त, गायब, तिरोहित, विलुप्त
- ओस – तुषार, हिमकण, हिमसीकर, हिमबिन्दु, तुहिनकण
- औरत – स्त्री, वामा, महिला, वनिता, रमणी, अंगना
- औंगा – गूंगा, वाक्विहीन, वाणीहीन
- औघर – अनगढ़, अटपट, अण्डबण्ड, असुन्दर
- औदात – श्वेत, गौर, शुक्ल, सफ़ेद, धौला
- औदास्य – उदासीनता, वैराग्य, अनिच्छा, मनोमालिन्य
- कंगाल – निर्धन, दरिद्र, अंकिंचन, गरीब
- कंचन – सुवर्ण, सोना, स्वर्ण
- कई – नाना, अनेक, विविध, एकाधिक, कई-एक
- कटाक्ष – व्यंग्य, आक्षेप, छींटाकशी
- कण्ठ – ग्रीवा, गला, शिरोधरा
- खग – विहग, विंहग, पक्षी, चिड़िया, पंछी, शकुनि
- खम्भा – थम्भ, स्तम्भ, स्तूप
- खल – दुष्ट, अधम, पामर, नीच, शठ, दुर्जन, कुटिल
- खंजन – सारंग, नीलकंठ, खड़रिच।
- खोज – अन्वेषण, शोध, आविष्कार, अनुसंधान।
- गंगा – भगीरथी, सुरसरि, देवसरि, त्रिपथगा
- गणेश – विनायक, एकदन्त, गजानन, गणाधि, लम्बोदर
- गर्भाशय – गर्भ, पेट, बच्चेदानी, उदर, जठर
- गरूण – खगेश, पन्नागारि, उरगारि, हरियान, वातनेय
- गाय – गौरी, गऊ, गइया, धेनु, भद्रा, गो, सुरभी
- घड़ा – घट, कलश, कुम्भ, गगरा, मटका, गगरी
- घिनौना – घृण्य, घृणास्पद, गर्हित, वीभत्स, गन्दा, घृणित
- घुमक्कड़ – रमता, सैलानी, पर्यटक, विचरणशील
- घन – बादल, वारिद, मेघ, वारिधर, जलधर।
- घर – ‘गेह’
- चन्द्रमा – निशानाथ, इन्दु, शशि, शशांक, सुधाकर
- चक्षु – आंख, नयन, नेत्र दृग, लोचन, अक्षि
- चन्दन – मलय, दिव्यगन्ध, हरिगन्ध, दारूसार, मलयज
- चपला – विद्युत, बिजली, दामिनी, तड़ित
- चांदी – रजत, रूपक, रूपा, रौप्य, गातरूप, चन्द्रहास
- छलांग – उछाल, फाँद, चौकड़ी, उछलकूद
- छोह – ममता, स्नेह-प्रेम, प्यार, मोहब्बत, प्रेम, स्नेह, दुलार
- छाती – उर, वक्ष, वक्षस्थल, सीना
- जगत् – विश्व, संसार, भव, जग, लोक
- जमुना – सूर्यतनया, सूर्यसुता, कालिन्दी, अर्कजा, तरणिजा, कृष्णा
- जल – तोय, पानी, वारि, नीर, सलिल, अम्बु, पय, जीवन
- जानकी – सीता, वैदेही, जनकसुता, जनकतनया, जनकात्मजा
- जीव – प्राणी, जीवधारी, जीवनधारी
- झंझट – व्यर्थ का झगड़ा, टंटा, बखेड़ा, प्रपंच
- झँपना – ढंकना, छुपना, आड़ में होना
- झकोर – हवा का झोंका, झटका, झोंका
- झरना – प्रताप, निर्झर, स्त्रोत, उत्स, प्रस्त्रवण
- झल – दाह, जलन, आंच
- टक्कर – ठोकर, भिड़न्त, संघट्ट, समाघात, धक्का
- टीका – व्याख्या, भाष्य, वृत्ति, भाषान्तरण, विवृत्ति
- टेढा – वक्र, बलदारन, कुटिल, टेढ़ा-मेढ़ा, तिरछा
- ठग – वंचक, प्रतारक, अड़ीमार, प्रवंचक, जालसाज़
- ठगी – प्रतारणा, वंचना, मायाजाल, फरेब, जालसाज़ी
- ठिठोली – मज़ाक, उपहास, फबती, व्यंग्य व्यंग्योक्ति
- ठौर – स्थान, जगह, स्थल, ठिकाना
- डर – भय, खौफ, त्रास, भीति, आतंक।
- डरावना – भंयकर, भयानक, भयावह, दहशतनाक
- डाकू – दस्यु, लुटेरा, लुण्ठित, बटमारा डकैत
- डोरी – जेवरी, सुतली, तनी, रस्सी, डोर
- डीलडौल – रूप, आकृति, बनावट, रचना, गठन गढ़न
- ढंग – रीति, तरीका, विधि, मुक्ति, उपाय तदबीर
- ढिठाई – धृष्टता, बेशरमी, अशिष्टता, गुस्ताखी, अविनय
- ढेर – जमाव, अम्बार, राशि, ओघ
- ढोंगी – पाखण्डी, बगुलाभगत, रंगासियार, कपटी, छल
- तत्पर – तैयार, उद्यत, मुस्तैद, कटिबद्ध, सन्नद्ध
- तन्मय – लीन, मग्न, तल्लीन, ध्यानमग्न, लवलीन
- तालाब – सर, जलाशय, कासार, ताल, सरसी, छद
- तिरस्कार – उपेक्षा, अपमान, निरादर, बेइज्जती, अवमानना, अवहेलना
- तीखा – तीक्ष्ण, तेज़, पैना, प्रखर
- थकान – थकावट, थकन, श्रान्ति, क्लान्ति
- थपेड़ा – चपेटा, थप्पड़, झापड़, चांटा
- थोथा – पोला, खाली, खोखला, रिक्त, छूछा
- थल – अन्त, हद, छोर, सिरा, सीमा
- दंग – चकित, विस्मित, हक्का-बक्का, हैरान, आश्चर्यचकित
- दंगा – उत्पात, उपद्रव, झगड़ा, फ़साद
- दण्ड – हज़ाना, जुर्माना, सज़ा, शासन, अर्थदण्ड
- दरार – कटाव, चीर, फटाव, फटन, कटान
- द्वेष – विरोध, दुश्मनी, खार, शत्रुता, बैर
- धनुष – पिनाक, चाप, शरसन, कमान।
- धीर – सहनशील, सहिष्णु, तितिक्षु।
- धूर्त्त – दुष्ट, खल, शठ, ठग।
- नदी – स्त्रोतस्विनी, लहरी, अपगा, निम्नगा, तरिणी
- नमक – लवण, लान, समरस, नोन
- नश्वर – विनाशी, नाशवान्, मरणशील, नाशाधीन, अनित्य
- निजी – व्यक्तिगत, खुद का, स्वकीय, अपना
- नित्य – शाश्वत्, अमर, अविनाशी, अमर्त्य, अनश्वर, सदा
- पंक – कीचड़, कीच, कर्दम
- पंकिल – गन्दला गन्दा, मैला, मलिन
- पकड़ना – कैद करना, बंदी बनाना, गिरफ्तार, करना
- पक्षी – पंछी, द्विज्, अण्डज, विहग, खग, विहंग, शकुनि, पतंग
- पटु – दक्ष, प्रवीण, निपुण, कुशल, होशियार, निष्णात, चतुर
- फणीन्द्र – शेषनाग, वासुकि, उरगाधिपति, सर्पराज, नागराज
- फणी – सर्प, सांप, फणिधर, नाग, उरग
- फूल – कुसुम, सुमन, प्रसून, पुष्प, लतान्त, पुहुप
- बगीचा – बाग, वाटिका, उद्यान, उपवन
- बचपन – बालपन, लड़कपन, लड़कई, बाल्यावस्था, बचपना
- बलात्कार – शीलभंग, सतीत्वहरण, बलात्सम्भोग, शीलहरण, शीलाघात
- बाण – तीर, तोमर, विशिख, नाराच, शर, इषु, सायक
- बालिका – बाला, कन्या, बच्ची, लड़की
- भेदी – जासूस, भेदिया, गुप्तचर, दूत
- भर्त्सना – कुत्सा, दुत्कार, झिड़की, डॉट-डपट, फटकार, निन्दा
- भाल – ललाट, कपाल, माथा, मस्तक
- भ्रमर – मधुकर, मधुप, अलि, भृग, भौंरा, मधुराज
- भ्रष्ट – दुष्ट, पाजी, लुच्चा, बदमाश लफंगा, लम्पट
- महादेव – शिव, शंकर, हर, महेश, गिरीश, त्रिलोचन, भूतनाथ
- महिमा – गरिमा, माहात्म्य, गौरव, बड़ाई, महत्ता
- मेघ – धराधर, घन, जलचर, वारिद, जीमुत, बादल
- मोक्ष – मुक्ति, निर्वाण, कैवल्य, अपवर्ग, परमपद
- मौलिक – वास्तविक, असली, आधारभुत, बुनियादी
- यम – सूर्यपुत्र, जीवनपति, अन्तक, धर्मराज, शमन, कीनास
- यमुना – कालिन्दी, अर्कजा, रवितनया, कृष्णा, जमुना कालगंगा
- याचना – निवेदन, प्रार्थना, विनय, अर्ज, विनजी
- युक्त – संलग्न, संयुक्त, जुड़ाहुआ, लगा हुआ
- युद्धभूमि – युद्धक्षेत्र, समरक्षेत्र, रणक्षेत्र रणस्थान, युद्ध का मैदान
- रंक – दरिद्र, कंगाल, अकिञचन, निर्धन, धनहीन
- रक्त – लोहित, लोहू, शोणित, खून, रूधिर
- रक्तपात – मार-काट, खून-खराबा, लड़ाई-झगड़ा
- रश्मि – कर, अंशु, मयूख, मरीच, किरण
- राजा – नृप, नृपति, भूप, महीप, नरेश, नरपति, भूपति
- लक्ष्मण – सुमित्रापुत्र, लखन, शेषावतार, रामानुज, सौमित्र
- लक्ष्मी – श्री, कमला, रमा, इन्दिरा, समुद्रजा हरिप्रिया
- लज्जा – शर्म, हया, ब्रीड़ा, संकोच, लाज
- लालसा – लोभ, अभिलाषा, लालच, लिप्सा, तृष्णा
- लोहा – आयस, सार, लौह, फौलाद, अश्मसा
- वंश – कुल, घराना, खानदान
- वक्ता – व्याख्याता, भाषणकर्ता, वाचक, प्रवक्ता
- वन – अरण्य, कानन, अटवी, विपिन, जंगल, कान्तार
- वर्षा – पावस, बरसात, वर्षाकाल, चौमासा, वर्षा, मेह, बारिश
- विधवा – पतिहीना, अनाथा, राँड़, पतिविहीना, पतिरहिता
- श्रृंगार – भूषा, साजसज्जा, रूपसज्जा, सिंगार, सजावट
- श्रमिक – मेहनतकश, मजदूर, कामगार, श्रमजीवी
- श्रेष्ठ – मुख्य, प्रधान, उत्कृष्ट, सर्वोपरि, विशिष्ट
- शैली – प्रणाली, ढंग, विधि, रीति, परिपाटि
- शत्रु – रिपु, दुश्मन, अरि।
- शराब – सुरा, मद्य, मदिरा, हाला।
- षण्ड – हिजड़ा, जनखा, नामर्द, नपुंसक
- षट्कोण – षड्कोणीय, षड्कोण, छःकोना
- संहार – बरबादी, समाप्ति, अन्त, नाश, ध्वंस, विध्वंस
- समता – तुल्यता, बराबरी, समत्व, सादृश्य, साम्य, समानता
- सान्त्वना – दिलासा, आश्वासन, ढाढस
- साफ – स्वच्छ, उजला, निर्मल, उज्जवल, शुक्ल, श्वेत, पवित्र
- संग्रह – संचय, संकलन, जमाव, एकत्र, एकट्ठा
- हंस – मराल, सरस्वतीवाहन, मुक्तभुक
- हत्या – खून, कत्ल, वध, जीवघात
- हिरण – मृग, सारंग, हरिण, सुरभी, कुरंग, चितल
- हनुमान – पवनसुत, पवनकुमार, महावीर, मारुतिनन्दन, कपिश, पवनपुत्र








